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इधर ईरान के साथ युद्ध में बिजी है अमेरिका, उधर चीन ने ताइवान पर चल दी ट्रंप जैसी चाल

 Published : Apr 10, 2026 02:19 pm IST,  Updated : Apr 10, 2026 02:21 pm IST

अमेरिका ईरान के साथ युद्ध में बिजी है। इधर चीन ने ताइवान के साथ बड़ा खेला शुरू कर दिया है। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ताइवान की विपक्षी नेता चेंग ली-वुन से मुलाकात की है।

ताइवान की विपक्ष की नेता चेंग ली-वुन से बीजिंग में मुलाकात करते शी जिनपिंग। - India TV Hindi
ताइवान की विपक्ष की नेता चेंग ली-वुन से बीजिंग में मुलाकात करते शी जिनपिंग। Image Source : PTI

बीजिंग: ईरान और अमेरिका युद्ध के बीच चीन ने ताइवान पर अमेरिका जैसी चाल चल दी है। अमेरिका के नक्शेकदम पर चलते ही चीन ने ट्रंप को अमेरिका के साथ युद्ध में बिजी देखकर ताइवान पर खेला शुरू कर दिया है। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने शुक्रवार को ताइवान की मुख्य विपक्षी पार्टी कुओमिनतांग (KMT) की अध्यक्ष चेंग ली-वुन से बीजिंग में मुलाकात की। इस कदम को ठीक उसी रूप में देखा जा रहा है जैसे अमेरिका ने हाल ही में वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो पर ऑपरेशन से पहले और मिशन पूरा होने के बाद विपक्ष की नेता को अपने पाले में बैठा रखा था। अमेरिका ऐसा अन्य देशों के साथ भी करता रहा है, जहां वह अपने पसंद का राष्ट्राध्यक्ष नहीं होने पर विपक्ष के नेता के आगे डोरे डालता है। 

ताइवान की विपक्षी नेता से क्यों मिले जिनपिंग?

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की ताइवान की विपक्षी नेता से मुलाकात को बड़े राजनीतिक घटनाक्रम के तौर पर देखा जा रहा है। चीन लंबे समय से ताइवान पर अपना दावा ठोकता रहा है। चीन का कहना है कि ताइवान चीन का ही हिस्सा है। हालांकि ताइवान की मौजूदा सरकार जिनपिंग के इस दावे को खारिज करती रही है। मगर विपक्ष का रुख लचीला है। इसी का फायदा चीन उठाना चाहता है। चेंग ली के साथ बैठक में शी ने कहा कि शांति दोनों पक्षों के लोगों की साझा इच्छा है। यह मुलाकात अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अगले महीने प्रस्तावित चीन यात्रा से ठीक पहले हुई है। इसलिए भी इस मुलाकात को बेहद अहम माना जा रहा है।  

एक दशक में चीन की यात्रा करने वाली पहली ताइवानी विपक्षी नेता बनीं चेंग ली

चेंग ली-वुन पिछले एक दशक में चीन की यात्रा करने वाली पहली विपक्षी अध्यक्ष हैं। चीन ताइवान को अपना अभिन्न अंग मानता है और उसे मुख्यभूमि के साथ पुनः एकीकरण करने का संकल्प बार-बार दोहराता रहा है। बीजिंग ताइवान पर सैन्य और कूटनीतिक दबाव बढ़ाने के साथ-साथ KMT जैसे बीजिंग समर्थक दलों का परोक्ष समर्थन भी करता है। मुलाकात के दौरान शी चिनफिंग ने कहा, “दोनों पक्षों के लोग चीनी ही हैं। हमें शांति चाहिए, विकास चाहिए, संवाद चाहिए और सहयोग चाहिए। यह हम सबकी साझा इच्छा है।” उन्होंने विश्वास जताया कि ताइवान जलडमरूमध्य के दोनों ओर रहने वाले लोग अंततः एक-दूसरे के और करीब आएंगे। शी ने कहा, “यह ऐतिहासिक प्रवृत्ति बदलने वाली नहीं है। दोनों ओर के लोगों का एक साथ आना इतिहास की निश्चितता है और हमें इस पर पूरा भरोसा है।”

चेंग ली ने टकराव से ऊपर उठने की अपील की

नवंबर 2016 के बाद KMT अध्यक्ष और चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के बीच यह पहली औपचारिक मुलाकात है। चेंग ली-वुन ने बैठक में कहा कि दोनों पक्षों को राजनीतिक टकराव से ऊपर उठकर ताइवान जलडमरूमध्य के पार एक साझा और पारस्परिक रूप से लाभकारी समुदाय बनाने की योजना बनानी चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि युद्ध को रोकने और बचने के लिए एक संस्थागत समाधान तलाशा जाना चाहिए, ताकि ताइवान जलडमरूमध्य शांतिपूर्ण विवाद समाधान का विश्व स्तर पर आदर्श उदाहरण बने। चेंग ने अपनी छह दिवसीय चीन यात्रा को “शांति की यात्रा” बताया। उन्होंने मंगलवार को शंघाई से यात्रा शुरू की और शंघाई तथा नानजिंग में भी जलडमरूमध्य के पार शांति पर जोर दिया।

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